28 जुलाई,2009
सुबह तीन बजे बिस्तर छोड़ देना पड़ा क्योंकि रायपुर के लिए उड़ान साढ़े छह बजे सुबह थी। वह भी सीधी नहीं वाया हैदराबाद । बंगलौर से छोटा हवाई जहाज हमें लेकर उड़ा। मेरे साथ फाउंडेशन की धीरा भी थी। साढ़े़ सात बजे हम हैदराबाद के शमशाबाद हवाई अड्डे पर थे। मौसम साफ पर ठ़ंडा था। रायपुर जाने वाला हवाई जहाज जैसे हमारी प्रतीक्षा में ही था। यह भी छोटा ही था। इस बार मैंने खिड़की वाली सीट चुनी। आठ बजे हैदराबाद से उड़े और दस बजे रायपुर के माना हवाई अड्डे पर थे। हैदराबाद से रायपुर के बीच का दृश्य देखने लायक था। रायपुर से कुछ पहले नीचे एक बहुत चौड़े पाट वाली नदी के दर्शन हुए। संभवत: महानदी थी। सबसे सुखद बात यह थी कि इसमें पानी भी था। पिछले दिनों इधर बारिश हुई थी। अच्छी बारिश।
फाउंडेशन के कम्प्यूटर एडेड लर्निग प्रोग्राम के तहत शिक्षक विकास परिचर्चा कार्यशाला का आयोजन धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड में था। धीरा और मुझे इस कार्यशाला में ही जाना था। कार्यशाला 30 से थी। मैं दो दिन रायपुर में रूकने वाला था। धीरा को सीधे कुरूद जाना था। उसे लेने टैक्सी आने वाली थी। हम उसके इंतजार में एयरपोर्ट पर बैठे रहे। लगभग ग्यारह बजे टैक्सी आई। उसने मुझे छत्तीसगढ़ शिक्षा स्रोत केन्द्र में छोड़ा। मैं दो दिन यहीं रहने वाला था। यह केन्द्र एकलव्य, विद्यामंदिर तथा दिगन्तर ने मिलकर बनाया है। एकलव्य के पुराने साथी संजय तिवारी इसके प्रभारी हैं। उनसे मिलने का भी लोभ था और उनके साथियों से भी। संजय और उनके साथियों से तो मुलाकात हुई। औपचारिक बातचीत हुई। टीचर्स पोर्टल के बारे में बात हुई।