इधर यायावरी पढ़ने बहुत कम लोग आते हैं। पर मन है कि
मानता ही नहीं लिखने से। चलो अपना काम तो लिखना है, ताकि सनद रहे।
रोहतक से अगला पड़ाव जयपुर का था दिल्ली होते हुए।
वहां अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के उत्तर क्षेत्र के सदस्यों का वार्षिक मिलन
समारोह था 20-21 मार्च,2012 को। हमारी गिनती दक्षिणी क्षेत्र में होती है, पर उत्तर
क्षेत्र के साथियों से मिलने के लिए मैंने यहां आना तय किया था।