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मंगलवार, 23 नवंबर 2010

'मेरा भी कुछ हक बनता है।'

                                                                                          फोटो: राजेश उत्‍साही
बंगलौर में हर रोज शाम को दफ्तर से घर  रोज पैदल जाना होता है। रास्‍ते में एक दर्जी का घर नजर आता है। यह गाय लगभग हर रोज  उसके घर के सामने मुझे इसी तरह खड़ी मिलती है। जैसे कह रही हो, 'मेरा भी कुछ हक बनता है।'
आप क्‍या कहते हैं ?