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बुधवार, 13 जनवरी 2010

बंगलौर के लालबाग में दो दीवाने

प्रस्तुतकर्ता राजेश उत्‍साही पर 5:16 am 1 टिप्पणी:
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राजेश उत्‍साही
अपने होने की सार्थकता की तलाश में दर-बदर। गुल्‍लक, यायावरी और गुलमोहर के माध्‍यम से समय से मुठभेड़ जारी है। मेरे किए-धरे को जानने में रुचि हो तो देखें 'एक नजर में राजेश उत्‍साही ।'
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