मासूम लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मासूम लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 5 फ़रवरी 2012

कोई मिलने के लिए बिछुड़ता है, तो कोई बिछुड़कर मिलता है..


पिछले कुछ दिनों से बंगलौर में अब शनिवार-रविवार जैसे काटने को दौड़ने लगे हैं। मैं उनसे हर संभव बचने की कोशिश करता हूं। कहने को तो इन दिनों अवकाश होता है, पर वे काटे नहीं कटते। ऐसे में अगर किसी से मिलने-जुलने का कार्यक्रम बन जाए तो लगता है, जैसे वीराने में बहार आ गई।  
**